Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language || 101 % Orignal आप जी ने अपनी तमाम ज़
;िंदगी गुरु चरणों में अर्पित कर दी।हिंदी,पंजाबी में जानकारी कम शब्दोंGuru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
- माता पिता :- बीबी निहाल कौर जी ,बाबा गुरदित्ता जी ,
- जन्म स्थान :- कीरतपुर जिला रोपड़
- जन्म तिथि :- 26 -2 -1630 ई : , 20 माघ सुदी 13 , संमत 1686
- धर्मपत्नी :- कोट कलयाणी जी , कृष्ण कौर जी
- संतान :– राम राय , हरकृष्ण साहिब
- गुरयाई :- 8 -3 -1644 , 12 चेत सुदी 7 संमत 1701 ( 17.6 वर्ष )
- जोति जोत :- 6 -10 -1661 ई : ( 7 कार्तिक वदी 9 संमत 1718 , कीरतपुर साहिब )
- आयु :- 32 साल
- आपके समय के हुक्मरान :- शाहजहान ओरंगजेब
Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
जन्म और बचपन
गुरु हर राय साहिब जी सिख धर्म में सातवें गुरु हुए है। आपने गुरु घर की मर्यादा हूँ बा हूँ आपसे पहले हुए गुरु सेहबान की तरह निभाई। गुरु नानक देव जी की चलाई मर्यादा को कायम रखा। आप जी का जन्म गुरु वंश में हुआ। गुरु हरगोबिंद साहिब जी के पांच पुत्र हुए। बाबा गुरदित्ता जी , बाबा अटल राय जी , बाबा सूरज मल जी ,बाबा अणि राय जी और गुरु तेग बहादुर जी। बाबा गुरदित्ता जी के दो पुत्र थे। बाबा धीरमल जी और गुरु हर राय साहिब जी। गुरु हर राय साहिब जी का जन्म 26 -2 -1630 ई : , 20 माघ सुदी 13 , संमत 1686 कीरतपुर जिला रोपड़ बीबी निहाल कौर जी ,बाबा गुरदित्ता जी के गृह में हुआ।
Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
बचपन में आप जी की पढ़ाई लिखाई ,शास्त्र विद्या और घोड़ सवारी गुरु हरगोबिंद जी की देख रेख में हुई। गुरु साहिब आप को हमेशा अपने साथ रखते थे। एक दिन गुरु हरगोबिंद साहिब जी और गुरु हर राय साहिब जी बाग़ में सैर कर रहे थे। बाग़ में एक फूल खिला देख गुरु जी ने माली की मेहनत की प्रशंसा की। जब गुरु जी वापस लोट रहे थे तो फूल को टहनी पर न देख माली से पूछा। माली ने बताया की गुरु जी सुबह हर राय साहिब जी के चोले से लग कर वह टूट गया। गुरु जी ने उस समय गुरु हर राय साहिब जी को कहा के अगर जिमेवारी ज्यादा बड़ी हो तो संभल कर चलना चाहए। इस सीख को आप जी ने तमाम जिंदगी याद रखा।
Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
शादी और संतान
गुरु हर राय साहिब जी की शादी 1640 ई : में अनूप शहर, जिला बुलंद शहर ,उत्तर प्रदेश के रहने वाले भाई दया राम जी की सपुत्री बीबी सुलखनी जी के साथ हुआ। ससुराल में बीबी जी नाम बदलकर कृष्ण कौर जी रख दिया गया। आप जी के गृह में दो सपुत्र हुए। बाबा राम राय जी और (गुरु) हरक्रिशन साहिब जी।
Guru Har Rai Sahib Ji History In Punjabi Language
गुरता का मिलना
आप जी के बड़े भाई धीर मल जी दुश्मनो के साथ मिलकर गुरु घर के खिलाफ साज़िशे करते रहते थे। करतारपुर की लड़ाई में भी पेंदे खां का साथ दिया। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने बहुत बार धीरमल को अपने पास कीरतपुर बुलाया लेकिन वह नहीं गए। गुरु अर्जन देव जी द्वारा लिखत आदि ग्रंथ साहिब उसके पास होने के कारण वह अपने आप को गुरता का हक़दार मानने लगा था। गुरु हरगोबिंद साहिब जी इस बात को अच्छी तरह जानते थे के गुरु हर राय जी ही गुरता के काबिल है। गुरु घर की मर्यादा को वह ही आगे लेकर जा सकते है। गुरु हरगोबिंद जी 6 चैत्र संमत 1701 3 मार्च 1644 ई : दिन रविवार को कीरतपुर में ज्योति जोत समा गए। वह जाने से पहले आप को गुरता दे गए। उस समय आप जी की आयु 14 वर्ष थी। आप जी ने गुरु घर की मर्यादा को आगे बढ़ाया। आप जी पहले पहर जाग सनान कर नितनेम करते। संगत को आप जी गुरबाणी के भाव अर्थ बताते। इस तरह आप ने गुरबाणी को चारो दिशाओ में फेलाया।
Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
नगरों का विकास
आप जी के समय में कीरतपुर घनी अबादी का शहर बन गया था। वहां हर किस्म के कारीगर आकर रहने लगे थे। आप जी नगर को सुंदर बनाने के लिए जगह जगह बाग़ लगवाए। जिनकी गिनती 52 थी। आप जी ने नगर को सुंदर बनाने के लिए बहुत से कदम उठाए। बाग़ बनने के कारण कीरतपुर का वातवरण शुद्व और साफ़ महकने लगा। इस नगर की दूर दूर तक चर्चा रहने लगी। इस नगर को बागो का नगर से जाना जाने लगा।
Guru Har Rai Sahib Ji History In Hindi Language
ज्योति जोत
गुरु घर की मर्यादा को आगे बढ़ाने के लिए गुरबाणी का प्रसार आप जी ने चारो दिशाओ में किया। बाबा राम राय की गुरबाणी को अलग तरह से पेश करने से आप जी के मन को बहुत ठेस पुहंची। आप जी ने कह दिया राम राय अब मेरे पास मत आना। आप जी को अपना अंत का समय नज़दीक आता देख अपने छोटे साहबज़ादे श्री हरकृष्ण साहिब जी को गुरता गद्दी संभाल दी। उस समय श्री हरकृष्ण साहिब जी की आयु 5 साल 3 महीने थी। अंत आप जी 6 -10 -1661 ई : ( 7 कार्तिक वदी 9 संमत 1718 ), कीरतपुर साहिब में जोय्ति जोत समा गए।
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